अन्यदाताओं की उम्मीदो पे फिरा पानी, किसी को करना था बेटी का विवाह, किसी को भरनी थी बच्चों की पढ़ाई की फीस


किसानों के लिए आफत बनी बे-मौसम ओले युक्त बारिश, सरसों की फसल चौपट, तो अन्य फसलों को भारी नुकसान


बे मौसम बारिश से अन्यदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरे


बारिश से गेहूं चौपट, किसान आहत


उत्तर प्रदेश(इटावा):- जसवंतनगर में बेमौसम बरसात और उसके साथ चली तेज हवा ने खेतों में खड़ी फसलों पर कहर बरपा दिया है। रविवार सुबह तक चली बरसात के चलते गेहूं, जौ, ग्वार के साथ सब्जियों फूलों की फसल नष्ट होने के कारण किसानों का नुकसान तो हुआ ही  है साथ ही किसानों के मुंह से रौनक भी गायब हो गई है।



अन्नदाता का प्राकृति कदम-कदम पर कड़ा इम्तिहान ले रही है। बैंक का कर्ज, बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी का सपना सबकुछ खेती पर निर्भर है, प्राकृति ने उन्हें हर मोर्चे पर निराश करने का काम किया। इससे पहले भी प्रकृति की मार से किसान संभल भी नहीं सके थे, शनिवार देर शाम कड़कड़ाती बिजली, बादलों की भारी गर्जना के साथ हुई बरसात शुरू हुई व रविवार की सुबह तक बारिश ने उन्हें बेबसी के आंसू रुलाने पर विवश किया। बारिश ने किसान के खेत को ही नहीं, बल्कि उनकी आत्मा को चोटिल करने का काम किया इतना ही नही किसानों की कमर तोड़ दी है। इसके चलते किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं, जौ, ग्वार, टमाटर, मिर्च, भिंडी, सेम फली के साथ फूलों की फसलें चौपट हो गई हैं।



प्रकृति आपदा ने किसानों का सुकून छीनने का काम किया। बैंक का कर्ज कैसे भरा जाएगा, बेटों की पढ़ाई किस प्रकार होगी, लगन में बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था, ले-देकर सबकुछ रबी की फसल पर टिका था। फसल भी इस बार काफी बेहतर नजर आई, परंतु बेमौसम बारिश एक फिर इनकी खेती के लिए आफत बनी। बारिश से गेहूं की फसलें जहां लेट गई, वहीं अरहर, चने की खेती को भी बहुत नुकसान पहुंचाया। किसानों में सुबोध पाठक ने बताया कि गेहूं की फसल बहुत अच्छी तैयार हो रही थी, परंतु बारिश ने केवल फसल को लिटा दिया है, आलू की फसलों के खेत गीला होने के कारण खुदाई में मुश्किल हो गया है। जो आलू की पैदावार 50 से 70 पैकेट एक बीघा में निकलते थे लगातार कई बार बारिशहोने से आलू की पैदावार में लगभग 60प्रतिशत तक का किसानों को घाटा हुआ है अभी तक हुई आलू की खुदाई में 20से25पैकेट प्रति बीघा से आलू की पैदावार निकल रही है किसानों के चेहरों पर चिन्ता की लकीरें हैं धरवार के किसान मुन्ना लाल व राजू ने बताया कि गेहूं व सरसो की फसल लेटने से बहुत क्षति हुई, अब जब धूप निकलेगी तो सरसो भी झरना शुरू हो जाएगी। फूलन सिंह ने बताया कि बारिश से सब्जी गोभी सहित फलवार अरहर व चने को भी नुकसान पहुंचाया, अभी तो कुछ गनीमत है, यदि आगे बारिश जारी रही तो फिर पूरी तरह से बर्बादी तय है।


इटावा ब्यूरो:- सुबोध कुमार पाठक