बच्चे कर रहे हैं टेबल साफ,मैडम दिखा रही है डंडा


 


इटावा:-  बसरेहर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम रसूलाबाद में स्थापित प्राइमरी पाठशाला मैं बच्चों को पढ़ाने के बजाय उन से काम लिया जा रहा है कौन से स्कूल का मौजूद फर्नीचर साफ कराया जा रहा है और डंडे के जोर पर स्कूल के अन्य कार्य कराए जाते हैं। पाठशाला परिसर में पहुंचने पर देखा कि स्कूल के बच्चे से टेबल साफ कराई जा रही है जब प्रधानाचार्य मीना यादव ने मौके पर पहुंची और उन्होंने देखा कि बच्चे का वीडियो बन रहा है।तो बच्चे को डंडे से झड़प कर वहां से भगा कर क्लास में भाग दिया। और कहा कि बच्चे थे टेबल साफ करने के लिए नहीं कहा गया था।


वह अपनी मर्जी से साफ करने लगा।वही स्कूल में टाइल्स का काम चलने की वजह से स्कूल के दो क्लासों में ताला लटका हुआ मिला जिस कारण स्कूल के तीसरी व चौथी क्लास के बच्चे पांचवी के साथ बैठाकर पढ़ाई जा रहे थे वहीं पहली व दूसरी क्लास के बच्चे पाठशाला परिसर में बना आंगनवाड़ी केंद्र के भवन में आंगनवाड़ियों के बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। स्कूल में करीब 75 बच्चों का रजिस्ट्रेशन था जिसमें करीब 50 बच्चे स्कूल परिसर में पढ़ने के लिए आए हुए थे स्कूल की सबसे बड़ी खामी एक नजर आई की स्कूल का सबसे पुराना भवन जो जर्जर हो चुका था और उसे उपयोग में भी नहीं लिया जा रहा है भगवान इतना जर्जर है कि इस बरसात के मौसम में किसी भी समय वह गिर सकता है अगर उसमें बच्चे चले गए और भवन गिर गया तो कभी भी बहुत बड़ा हादसा हो सकता है प्रधानाध्यापक ने बताया कि इस जर्जर भवन के गिराने के बारे में कई बार अपने अधिकारियों को बताया जा चुका है लेकिन अभी तक इस पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।


वहीं दूसरी घटना बसरेहर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम खडैता में जहां स्कूल एक टापू में तब्दील हो गया। गांव खडैता में बने इस स्कूल को आज करीब 3 वर्ष होने जा रहे हैं लेकिन इस स्कूल को बना तो दिया गया लेकिन रास्ता अभी तक के स्कूल का नहीं बनाया गया जिस कारण स्कूल के चारों तरफ पानी भर जाता है और स्कूल दूर से देखने पर एक टापू सामान लगता है पानी भर जाने के कारण बरसात के दिनों में स्कूल में बच्चे नहीं पहुंचते और टीचर भी जो पहुंचते हैं उनको अपनी गाड़ी गांव में स्कूल से करीबन 400 मीटर दूर खड़ी करनी पड़ती है और जूते उतार कर घुटनों से ऊपर तक कपड़े समेटकर स्कूल में जाना पड़ता है देखा जाए तो उनके जाने का भी स्कूल में कोई फायदा नहीं सिर्फ हाजिरी लगाने के लिए अध्यापकों को स्कूल में जाना पड़ता है कोई भी बच्चा इस 3 महीने के अंतराल में स्कूल में पढ़ने नहीं आता है कहने को तो उसे स्कूल में 16 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है लेकिन धरातल पर कोई भी बच्चा मौके पर नजर नहीं आता है।


रिपोर्टर:- राजेन्द्र कुमार